राजा किसी बात पर अपने मंत्री से क्रोधित हो गया तो उसने उसे राज्य की सबसे ऊँची मीनार पर नजरबंद करवा दिया। उसकी पत्नी बहुत चिंतित हुई कि अब उसके पति का क्या होगा? पर मंत्री पूर्णतया निश्चिंत था। उसने धीरे से अपनी पत्नी से कहा, "तुम बस, रेशम का पतला सूत मेरे पास पहुँचा देना, मैं मुक्त हो जाऊँगा।" यह जानकर पत्नी बहुत आश्चर्यचकित हुई और सोचने लगी कि भला सूत वहाँ तक कैसे पहुँचाया जाए और पहुँचा भी दें तो उससे पति कैसे आजाद होंगे।
इसी उधेडृबुन में वह अपने गुरु के पास पहुँची और उसने उन्हें सारी समस्या बताई। गुरु मुस्कुराए और बोले, "पुत्री! तू एक भृंगी (कीडा़) पकड़कर ला और उसके पैंरों में सूत बाँध दे, फिर उसकी मूँह के बालों पर शहद की बूँद टपकाकर उसे मीनार की चोटी की ओर मुँह करके छौड़ देना।" पत्नी को कुछ समझ में न आया, पर उसने गुरू की आज्ञा का पालन किया। भृंगी शहद की सुगंध का पीछा करते-करते मीनार की सबसे ऊँची मंजिल पर जा पहुँचा। सूत के वहाँ पहुँचने पर उसके सहारे डोरी और डोरी के सहारेरस्सा वहाँ पहुँचाया गया। रस्से का सहारा लेकर मंत्री वहाँ से मुक्त हो गया। साधारण-सी आशा के सहारे जब एक कीडा़ मीनार के बुर्ज तक जा पहुँचा तो मनुष्य तो ज्यादा विभूतियों का स्वामी है, यदि वह ठान ले तो जीवन में एक से बढ़कर एक ऊँचाइयों को प्राप्त कर सकता है।
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