Saturday, January 21, 2023

कल्कि अवतार (भुमिका)

      जब से इस देश में कल्कि अवतार विषयक विभिन्न पुस्तकों का प्रकाशन प्रारम्भ हुआ और जनता को यह ज्ञात हुआ कि कल्कि अवतार के प्राकट्य का समय व्यतीत हो चुका है, तभी से नकली अवतारों की बाढ़ सी आ गई है। पिछले ईश्वरीय अवतारों की कथाएँ पढ़कर तथा उनकी लीलाएँ देखकर, लोग उसी भाँति की कल्पना के अनुरुप आज के ईश्वरीय अवतार को देखने की आशा करते हैं। लोगों की इस मनोवृत्ति को धोखा देकर दम्भी और ढोंगी स्वयं को अवतार के रूप में प्रसिद्ध कर उन्हें ठग रहे है। समय-चक्र बडा़ बलवान है, ऐसे अनेक ढोंगियों का भाण्डा फूट चुका है और आज उनके अस्तित्व तक का पता नहीं है।
      आज मानव समाज अपने दुःखों से त्रस्त है अतः इधर-उधर भटकता फिरता है। दिग्भ्रमित लोगों को इस पशोपेश की स्थिति से निकालकर सही दिशा निर्देश देना हम अपना सर्वोच्च कर्त्तव्य समझते है।
      सन 1972 में लेखक की इसी विषय की पुस्तक "कल्कि अवतार की खोज" प्रकाशित हुई थी तथा उस पुस्तख की सभी प्रतिया़ँ हाथों हाथ समाप्त हो गई। तभी से उसके द्वितीय संस्करण के प्रकाशन की माँग पर माँग आ रही थी। अतः इस विषय की सभी आवश्यक बातों को संक्षेप में इस पुस्तक "काल्कि अवतार" के पाठकों  की सेवा में प्रस्तुत है।
      लेखक का यह प्रयास सागर में एक बूंद के समान है क्योंकि इस सम्बन्ध की विशाल सामग्री संतवाणियों के रूप में अनेकानेक भारतीय भाषाओं में बिखरी पडी़ है। इस देश के भावी श्रद्धालु, खोजी विद्वान निःसंदेह बडे़ यश के भागी होंगे जो उस सामग्री को प्रकाश में लाएंगे।
      जिनकी कृपा से मूक वाचाल हो जाते हैं और पंगु ऊँचे-ऊँचे पर्वतों पर भी चढ़ जाते हैं, उन भगवान 'दयाल' को, जो सर्व कलियुग के पापों को नष्ट करने वाले है, मैं नमस्कार करता हूँ। द्वापर युग में प्रकट होने वाले वेद व्यास, महर्षि कृष्ण द्वैपायन, जिन्होंने संसार के लिए उस ईश्वरीय ज्ञान को सुलभ करके वेदों का सम्पादन किया तथा अनेकानेक रहस्यों से युक्त पुराणों की रचना की। उन दिव्य ज्ञानी 'कलाप' ग्राम स्थित साक्षात ज्ञानस्वरूपा को मैं बारम्बार नमस्कार करता हूँ। उन सब देवात्माओं को, जिन्होंने कलियुग के प्रतीक्षाकाल में इस पृथ्वी पर जन्म लिया और अपने उपदेशों द्वारा समस्त जनों को भक्ति तथा मानवीय एकता की शिक्षा दी, मैं नमस्कार करता हूँ। कल्कि अवतार के साथ प्रकट होने वाले प्रातः स्मरणीय उन अनेक संतों (ऋषियों) को जो उनके नाम पर बलिदान हो गये को मैं नमस्कार करता हूँ।
 
प्रभुधर्म की सेवा मे
प्रकाश नारायण मिश्र 
  

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